श्री सतीश कुमार शर्मा की जीवन-यात्रा मेहनत, लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण और समाज के लिए कुछ सार्थक करने की सोच का प्रेरणादायी उदाहरण है। वर्ष 2011-12 में बिलासपुर में पीएससी की तैयारी के दौरान वे कई प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित हुए। आगे उन्हें विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करने के अवसर मिले, लेकिन उनके मन में शिक्षा के क्षेत्र में कुछ अलग और सार्थक करने का सपना लगातार बना रहा।
बिलासपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उन्होंने करीब से महसूस किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कोचिंग की बढ़ती फीस अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। इसी अनुभव ने उनके भीतर यह विचार जन्म दिया कि आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों को निःशुल्क मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य को साकार करने की दिशा में उन्होंने वर्ष 2018 में केवल्य एकेडमी की स्थापना की।
एक अनुभव जिसने बदल दी सोच
निःशुल्क कोचिंग की सोच के पीछे श्री शर्मा का एक बेहद भावुक अनुभव रहा। कोचिंग के दौरान एक बच्चा पूरे वर्ष पूरी लगन से पढ़ता रहा। उसने कहा कि फसल कटने के बाद वह अपनी फीस जमा कर देगा। लेकिन अंतिम समय में उसकी तबीयत खराब हो गई और वह फीस जमा नहीं कर सका। इस घटना ने श्री शर्मा को भीतर तक झकझोर दिया।
उन्हें महसूस हुआ कि किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की शिक्षा के रास्ते में उसकी आर्थिक स्थिति बाधा नहीं बननी चाहिए। इसी अनुभव के बाद निःशुल्क शिक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाने का उनका संकल्प और मजबूत हुआ।
चुनौतियों के बीच बढ़ते कदम
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के सामने महंगी किताबें, उचित मार्गदर्शन का अभाव और सीमित संसाधन जैसी कई चुनौतियां होती हैं। केवल्य एकेडमी की शुरुआत के समय श्री शर्मा को भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी।
समय के साथ विद्यार्थी उनसे जुड़ते गए और संस्था ने अपनी अलग पहचान बनानी शुरू की। कोरोना काल के बाद उन्होंने तमनार, पुसौर और बिलाईगढ़ जैसे क्षेत्रों में करीब 300 विद्यार्थियों को निःशुल्क कोचिंग प्रदान की। उनका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना नहीं था, बल्कि उनमें आत्मविश्वास जगाना और जीवन में आगे बढ़ने का हौसला पैदा करना भी रहा।
प्रेरणा का महत्वपूर्ण पड़ाव
लॉ कॉलेज में पढ़ाते समय एक अवसर पर ओपी चौधरी जी वहां पहुंचे। उस दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की मौजूदगी और शिक्षा के प्रति उनका उत्साह देखकर श्री शर्मा प्रभावित हुए। संवाद के दौरान उन्हें भविष्य में किसी सहयोग की आवश्यकता होने पर साथ देने की बात कही गई।
यह अनुभव उनके लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत बना। इसके बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी भूमिका को और अधिक गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया।
उपलब्धियों से बढ़ा उत्साह
श्री सतीश कुमार शर्मा को उनके कार्यों के लिए कई अवसरों पर सम्मानित भी किया गया। वर्ष 2018 में फिल्म अभिनेत्री मुकेश खन्ना के हाथों उन्हें क्वालिटी गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया। वहीं वर्ष 2019 में फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा के हाथों सम्मानित होने का अवसर मिला।
इन सम्मानों ने उनके प्रयासों को पहचान देने के साथ-साथ उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक उत्साह एवं ऊर्जा के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी।
टीमवर्क को मानते हैं सफलता की कुंजी
श्री शर्मा का मानना है कि किसी भी संस्था की सफलता केवल एक व्यक्ति के प्रयासों से संभव नहीं होती। केवल्य एकेडमी में शिक्षकों के साथ नियमित रूप से बैठकर योजनाएं बनाई जाती हैं। सभी की समस्याओं को सुना और समझा जाता है तथा मिलकर उनके समाधान की दिशा में काम किया जाता है।
उनका मानना है कि जब तक टीम का प्रत्येक सदस्य एक-दूसरे के साथ सहयोग और समन्वय से काम नहीं करेगा, तब तक संस्था को सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाना संभव नहीं है।
विद्यार्थियों की सफलता सबसे बड़ा संतोष
जब कोई विद्यार्थी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पूरी मेहनत करता है, प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होता है और बेहतर परिणाम हासिल करता है, तो यही क्षण श्री शर्मा के लिए सबसे सुखद और यादगार बन जाता है।
विद्यार्थियों की सफलता को वे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। उनके लिए किसी विद्यार्थी का आगे बढ़ना और अपने लक्ष्य को हासिल करना ही उनके प्रयासों की सबसे बड़ी सार्थकता है।
सफलता का मंत्र और भविष्य की योजना
श्री सतीश कुमार शर्मा का मानना है कि मेहनत, निरंतर प्रयास और धैर्य ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं। असफलता के डर से व्यक्ति को अपनी मंजिल का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि हर चुनौती से सीख लेकर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
भविष्य में उनका लक्ष्य विभिन्न क्षेत्रों में और अधिक निःशुल्क कोचिंग सेंटर स्थापित करना है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उचित मार्गदर्शन मिल सके।
शिक्षा को सेवा का माध्यम बनाकर युवाओं के भविष्य को संवारने की दिशा में श्री सतीश कुमार शर्मा का यह प्रयास न केवल जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए अवसर का द्वार खोल रहा है, बल्कि यह संदेश भी दे रहा है कि सही सोच, दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
