बाजार की मूर्ति नहीं, अपने हाथों से गढ़े बप्पा; 19 वर्षीय प्रियांशी ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल

मिट्टी, रूई और पेपर से एक सप्ताह की मेहनत में तैयार की गणेश प्रतिमा, प्राकृतिक रंगों से किया श्रृंगार

रायपुर। गणेशोत्सव के पावन अवसर पर 19 वर्षीय प्रियांशी नायक ने भक्ति के साथ रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दिया है। बाजार से गणेश प्रतिमा खरीदने के बजाय प्रियांशी ने अपने घर पर ही शुद्ध मिट्टी, रूई और पेपर की मदद से भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमा तैयार की। करीब एक सप्ताह की मेहनत से बनाई गई यह प्रतिमा अब उनके परिवार, रिश्तेदारों और मोहल्ले के लोगों के साथ सोशल मीडिया पर भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

प्रियांशी ने बताया कि उन्होंने कभी ड्राइंग या पेंटिंग का औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया। अपनी रचनात्मक सोच और कौशल के सहारे उन्होंने पहली बार स्वयं भगवान गणेश की प्रतिमा बनाने का प्रयास किया। प्रतिमा को पूरी तरह प्राकृतिक मिट्टी और रंगों से तैयार किया गया है, ताकि विसर्जन के बाद यह आसानी से पानी में घुल सके और पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल गणेश प्रतिमा बनाना नहीं था, बल्कि लोगों तक यह संदेश पहुंचाना था कि परंपराओं और आस्था को पर्यावरण संरक्षण के साथ भी निभाया जा सकता है। अपने हाथों से बप्पा को आकार देने से उन्हें जो खुशी और आत्मिक शांति मिली, वह बाजार से खरीदी गई मूर्ति में संभव नहीं है। प्रियांशी ने लोगों से प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के बजाय मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाने की अपील की।

दस दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान प्रतिदिन विधिवत पूजा-अर्चना के बाद अनंत चतुर्दशी के अवसर पर महाआरती के साथ प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। प्राकृतिक सामग्री से बनी इस प्रतिमा के माध्यम से प्रियांशी ने आस्था के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी संदेश दिया है।

दादाजी से मिली प्रेरणा

प्रियांशी के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा बनाना केवल एक कलात्मक प्रयोग नहीं, बल्कि परिवार की परंपरा से जुड़ी भावनात्मक पहल भी है। उन्होंने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा अपने दादाजी स्वर्गीय सिद्धेश्वर सिंह नायक से मिली, जो शिक्षक थे और अपने हाथों से गणेशजी की प्रतिमा बनाकर उसकी पूजा किया करते थे। परिवार में वर्षों से घर पर गणेश प्रतिमा स्थापित कर पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।

पढ़ाई के साथ कला और खेलों में भी रुचि

जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम धौराभांठा की मूल निवासी प्रियांशी, लाल कुमार नायक और श्रीमती शर्मिला नायक की इकलौती बेटी हैं। उन्होंने हाईस्कूल तक की पढ़ाई डीपीएस रायगढ़ से तथा हायर सेकेंडरी की पढ़ाई ए.के. गोयल पब्लिक स्कूल, रायपुर से की है। पढ़ाई के साथ उन्हें ड्राइंग, पेंटिंग, स्विमिंग और हॉर्स राइडिंग में भी विशेष रुचि है।

प्रियांशी के पिता लाल कुमार नायक व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि उनकी माता श्रीमती शर्मिला नायक योग शिक्षिका एवं योग कोच हैं। परिवार से मिले संस्कार और दादाजी की प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए प्रियांशी ने पहली बार अपने हाथों से गणेश प्रतिमा बनाकर यह साबित किया है कि भक्ति, कला और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संगम घर से ही शुरू किया जा सकता है।

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